PM Kusum Yojana: सोलर पंप पर कितनी सब्सिडी मिलेगी? रजिस्ट्रेशन, पात्रता और राज्यवार पोर्टल
Written By Dilshad AhmadPublished: 12 October 2026 • 08:26 AM IST
PM Kusum Yojana: खेती में सिंचाई का खर्च किसानों की आमदनी पर सीधा असर डालता है। जिन किसानों को खेतों में पानी देने के लिए डीजल पंप चलाना पड़ता है, उनके लिए ईंधन का खर्च एक बड़ी चुनौती बन सकता है। बिजली से चलने वाले कृषि पंपों के मामले में भी बिजली आपूर्ति और सिंचाई के समय जैसी समस्याएं सामने आती हैं। ऐसी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान यानी PM-KUSUM Yojana शुरू की थी। इसका उद्देश्य कृषि क्षेत्र में सौर ऊर्जा का इस्तेमाल बढ़ाना, सिंचाई के लिए सोलर पंपों को प्रोत्साहित करना और किसानों को सौर ऊर्जा से जुड़े अवसर उपलब्ध कराना है।
इस योजना को लेकर किसानों के मन में कई सवाल होते हैं—क्या सोलर पंप पर 60 प्रतिशत सब्सिडी मिलती है? ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कहां से करना है? क्या आवेदन के लिए जमीन के कागजात जरूरी हैं? अपने राज्य का आधिकारिक पोर्टल कैसे खोजें? और अगर आवेदन पहले से किया हुआ है, तो उसका स्टेटस कहां चेक करें?
इस लेख में PM Kusum Yojana के तीनों घटकों, सब्सिडी की सामान्य व्यवस्था, पात्रता, जरूरी दस्तावेज, आवेदन की प्रक्रिया और राज्यवार आधिकारिक जानकारी तक पहुंचने का तरीका समझाया गया है। ध्यान रखें कि योजना की उपलब्धता, आवेदन की तारीख, लाभार्थियों की संख्या और राज्य की सब्सिडी संबंधी शर्तें अलग-अलग हो सकती हैं।
MNRE के आधिकारिक योजना पेज पर PM-KUSUM की मूल अवधि 31 मार्च 2026 तक दर्ज है। इसका अर्थ यह नहीं है कि अक्टूबर 2026 में हर राज्य में नए आवेदन खुले हैं। आवेदन करने से पहले राष्ट्रीय पोर्टल, राज्य की कार्यान्वयन एजेंसी और नवीनतम सरकारी आदेश से यह जरूर जांचें कि संबंधित घटक के लिए नई आवेदन प्रक्रिया उपलब्ध है या नहीं।
PM Kusum Yojana क्या है?
PM-KUSUM का पूरा नाम Pradhan Mantri Kisan Urja Suraksha evam Utthaan Mahabhiyan है। यह नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) की योजना है, जिसके अंतर्गत कृषि क्षेत्र में सौर ऊर्जा की क्षमता बढ़ाने के लिए अलग-अलग प्रकार की परियोजनाओं को सहायता दी जाती है।
यह योजना केवल सोलर पंप लगवाने तक सीमित नहीं है। इसके तीन प्रमुख घटक हैं। पहले घटक में विकेंद्रीकृत सौर ऊर्जा परियोजनाएं, दूसरे में ग्रिड से अलग चलने वाले सोलर कृषि पंप और तीसरे में पहले से बिजली ग्रिड से जुड़े कृषि पंपों या कृषि फीडरों का सोलराइजेशन शामिल है।
किसी किसान के लिए कौन-सा विकल्प उपयुक्त होगा, यह उसकी जमीन, सिंचाई व्यवस्था, मौजूदा बिजली कनेक्शन, राज्य की योजना और स्वीकृत परियोजना पर निर्भर करता है।
PM Kusum Yojana के तीनों घटक समझें
| घटक | किस काम के लिए? | किसके लिए उपयोगी? |
|---|---|---|
| Component A | ग्रिड से जुड़ी विकेंद्रीकृत सौर ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित करना। | पात्र किसान, किसानों के समूह, सहकारी समितियां, पंचायतें, FPO और अन्य अनुमत संस्थाएं। |
| Component B | ऐसे कृषि क्षेत्रों में स्टैंड-अलोन सोलर पंप लगाना जहां ग्रिड बिजली उपलब्ध नहीं है या उपयुक्त नहीं है। | पात्र किसान, संबंधित राज्य की स्वीकृत प्रक्रिया और शर्तों के अनुसार। |
| Component C | मौजूदा ग्रिड-कनेक्टेड कृषि पंपों या कृषि फीडरों का सोलराइजेशन। | मौजूदा बिजली कनेक्शन वाले पात्र किसान या संबंधित परियोजना में शामिल लाभार्थी। |
किसी राज्य में Component B का आवेदन खुला होने का अर्थ यह नहीं है कि Component A या Component C के लिए भी आवेदन खुले होंगे। इसलिए पोर्टल पर योजना का नाम देखने के साथ-साथ संबंधित घटक और आवेदन की स्थिति भी जांचें।
PM Kusum Yojana में कितनी सब्सिडी मिलती है?
योजना में केंद्र सरकार की वित्तीय सहायता के साथ राज्य सरकार की सहायता भी शामिल हो सकती है। लेकिन सब्सिडी की गणना पंप की स्वीकृत क्षमता, निर्धारित बेंचमार्क लागत या टेंडर लागत, राज्य के योगदान और लागू दिशा-निर्देशों के अनुसार होती है।
इसी वजह से किसी एक निश्चित राशि को पूरे भारत के सभी किसानों के लिए लागू मानना सही नहीं होगा।
Component B: स्टैंड-अलोन सोलर पंप
MNRE के योजना विवरण के अनुसार, सामान्य राज्यों में Component B के अंतर्गत पात्र पंप के लिए केंद्र की वित्तीय सहायता निर्धारित बेंचमार्क लागत या टेंडर लागत में से कम लागत के आधार पर 30 प्रतिशत तक हो सकती है। राज्य सरकार की सहायता कम-से-कम 30 प्रतिशत होने की व्यवस्था भी बताई गई है। शेष हिस्सा किसान को देना पड़ सकता है, और दिशा-निर्देशों के अनुसार बैंक वित्त का विकल्प उपलब्ध हो सकता है।
कुछ पूर्वोत्तर राज्यों, सिक्किम, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और निर्दिष्ट द्वीपीय क्षेत्रों में केंद्र की सहायता का अनुपात अलग हो सकता है। संबंधित श्रेणियों के लिए MNRE के विवरण में 50 प्रतिशत तक केंद्रीय सहायता का प्रावधान बताया गया है। वास्तविक लाभ की गणना संबंधित राज्य की स्वीकृत व्यवस्था से जांचनी चाहिए।
Component C: मौजूदा कृषि पंप का सोलराइजेशन
इस घटक में पहले से ग्रिड से जुड़े कृषि पंपों को सौर ऊर्जा से चलाने की व्यवस्था की जा सकती है। किसान सिंचाई के लिए सौर ऊर्जा का इस्तेमाल कर सकता है और लागू व्यवस्था के अनुसार अतिरिक्त बिजली DISCOM को बेचने का विकल्प भी हो सकता है। अतिरिक्त बिजली की खरीद और भुगतान राज्य के नियमों तथा लागू टैरिफ पर निर्भर करते हैं।
Component C में सौर ऊर्जा प्रणाली की लागत पर केंद्रीय सहायता और राज्य का योगदान लागू दिशा-निर्देशों के अनुसार तय होता है। सभी किसानों को समान राशि मिलना जरूरी नहीं है।
Component A: सौर ऊर्जा परियोजना
Component A सामान्य सोलर पंप आवेदन से अलग है। इसमें निर्धारित क्षमता की ग्रिड-कनेक्टेड सौर ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित की जाती हैं। पात्र किसान या संस्थाएं अपनी जमीन पर परियोजना विकसित करने, डेवलपर के साथ काम करने या संबंधित व्यवस्था के अनुसार भूमि लीज पर देने जैसे विकल्पों पर विचार कर सकती हैं। बिजली की खरीद राज्य के नियामक द्वारा निर्धारित टैरिफ और DISCOM की लागू व्यवस्था पर निर्भर करती है।
किसी वेबसाइट पर “हर किसान को 90 प्रतिशत सब्सिडी”, “फ्री सोलर पंप की गारंटी” या “तुरंत पैसा जमा करके पंप पाएं” जैसे दावे दिखें, तो उन्हें आधिकारिक आदेश से जांचे बिना सही न मानें। योजना की सब्सिडी और लाभार्थी चयन के नियम संबंधित घटक तथा राज्य की व्यवस्था पर निर्भर करते हैं।
PM Kusum Yojana के लिए पात्रता क्या है?
पात्रता इस बात पर निर्भर करती है कि आवेदन Component A, B या C के अंतर्गत किया जा रहा है। सोलर पंप के लिए आवेदन करने वाले किसान को सामान्य रूप से निम्नलिखित बातों की जांच करनी चाहिए:
- आवेदक संबंधित राज्य की लागू योजना और लाभार्थी संबंधी शर्तों को पूरा करता हो।
- कृषि भूमि या खेती से संबंधित जरूरी दस्तावेज उपलब्ध हों।
- जिस घटक के लिए आवेदन किया जा रहा है, उसके अनुसार उपयुक्त सिंचाई व्यवस्था या बिजली कनेक्शन की जानकारी हो।
- यदि मौजूदा कृषि पंप का सोलराइजेशन कराना है, तो बिजली कनेक्शन और पंप संबंधी विवरण मांगे जा सकते हैं।
- आवेदक के नाम, बैंक खाते और पहचान संबंधी विवरण में जरूरी समानता हो।
- राज्य द्वारा तय आवेदन अवधि, क्षमता, जिले, किसान श्रेणी और लाभार्थी चयन की शर्तें पूरी होती हों।
यह सामान्य जांच सूची है, अंतिम पात्रता सूची नहीं। संबंधित राज्य की आधिकारिक अधिसूचना में दिए गए नियम ही लागू माने जाएंगे।
PM Kusum Yojana के लिए जरूरी दस्तावेज
ऑनलाइन आवेदन के समय सभी राज्यों में एक जैसे दस्तावेज मांगे जाएं, यह जरूरी नहीं है। फिर भी आवेदन से पहले नीचे दिए गए दस्तावेजों और जानकारियों को तैयार रखना उपयोगी हो सकता है।
| दस्तावेज या जानकारी | किस काम आ सकती है? |
|---|---|
| आधार या मान्य पहचान पत्र | आवेदक की पहचान सत्यापित करने के लिए, जैसा पोर्टल पर मांगा जाए। |
| मोबाइल नंबर | OTP, आवेदन संबंधी संदेश और संपर्क के लिए। |
| भूमि संबंधी दस्तावेज | खेती की जमीन और आवेदक के अधिकार से संबंधित जानकारी के लिए। |
| बैंक खाते की जानकारी | जहां लागू हो, भुगतान या वित्तीय सत्यापन के लिए। |
| कृषि बिजली कनेक्शन का विवरण | विशेष रूप से मौजूदा ग्रिड-कनेक्टेड पंप के सोलराइजेशन के मामलों में। |
| पंप और सिंचाई संबंधी विवरण | पंप की क्षमता, सिंचाई की जरूरत और उपयुक्त प्रणाली तय करने के लिए। |
| जाति या श्रेणी प्रमाणपत्र | केवल तब, जब संबंधित राज्य की योजना में इसकी जरूरत हो। |
आवेदन से पहले आधिकारिक पोर्टल पर दस्तावेजों की नवीनतम सूची पढ़ें। OTP, बैंक विवरण या पहचान संबंधी जानकारी किसी अनधिकृत एजेंट को न दें।
PM Kusum Yojana Registration Online कैसे करें?
PM-KUSUM का आवेदन सामान्यतः राज्य सरकार की नामित कार्यान्वयन एजेंसी, संबंधित विभाग या उसके आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से संचालित होता है। इसलिए सबसे पहले यह पता करना जरूरी है कि आपके राज्य में किस घटक के लिए आवेदन उपलब्ध है।
- राष्ट्रीय पोर्टल खोलें: PM-KUSUM National Portal पर जाएं।
- राज्य की एजेंसी खोजें: पोर्टल पर Implementation Agencies या How to Apply से संबंधित जानकारी देखें।
- आवेदन की स्थिति जांचें: संबंधित राज्य के आधिकारिक पोर्टल पर देखें कि नए आवेदन स्वीकार किए जा रहे हैं या नहीं।
- सही घटक चुनें: स्टैंड-अलोन पंप के लिए Component B, मौजूदा ग्रिड-कनेक्टेड पंप के सोलराइजेशन के लिए Component C और सौर ऊर्जा परियोजना के लिए Component A की जानकारी देखें।
- निर्देश पढ़ें: आवेदन की पात्रता, पंप की क्षमता, किसान का अंशदान, सब्सिडी, भुगतान और चयन प्रक्रिया को ध्यान से पढ़ें।
- फॉर्म भरें: आवेदन उपलब्ध होने पर मांगी गई व्यक्तिगत, भूमि, बैंक और कृषि संबंधी जानकारी सही-सही भरें।
- दस्तावेज जमा करें: पोर्टल द्वारा मांगे गए दस्तावेज अपलोड करें या निर्धारित तरीके से सत्यापन पूरा करें।
- आवेदन संख्या सुरक्षित रखें: फॉर्म जमा होने के बाद प्राप्त रजिस्ट्रेशन नंबर, रसीद या आवेदन संख्या संभालकर रखें।
- आधिकारिक निर्देश के अनुसार आगे बढ़ें: विभाग की जांच, चयन, स्वीकृति, लाभार्थी अंशदान और पंप स्थापना की प्रक्रिया पूरी करें।
राष्ट्रीय पोर्टल पर योजना की जानकारी उपलब्ध होने का मतलब यह नहीं कि हर राज्य में ऑनलाइन आवेदन चालू है। अगर आवेदन बटन बंद है या पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन बंद होने का संदेश है, तो नई आधिकारिक सूचना का इंतजार करें या संबंधित विभाग से संपर्क करें।
PM Kusum Yojana State Wise Portal कैसे खोजें?
PM-KUSUM को राज्य सरकारों की नामित एजेंसियों के माध्यम से लागू किया जाता है। इस कारण किसान को अपने राज्य के अनुसार सही वेबसाइट चुननी चाहिए। किसी दूसरे राज्य का आवेदन पोर्टल आपके जिले या राज्य के लिए लागू हो, यह जरूरी नहीं है।
राज्यवार कार्यान्वयन एजेंसियों की जानकारी पाने का सबसे सुरक्षित तरीका राष्ट्रीय पोर्टल पर उपलब्ध आधिकारिक सूची देखना है।
1. राष्ट्रीय PM-KUSUM पोर्टल
केंद्र सरकार की योजना, दिशा-निर्देश, कार्यान्वयन एजेंसियों, विक्रेता सूची और अन्य आधिकारिक जानकारी के लिए।
2. राज्यवार कार्यान्वयन एजेंसियां
अपने राज्य की संबंधित एजेंसी, आवेदन संबंधी निर्देश और उपलब्ध संपर्क जानकारी देखने के लिए आधिकारिक सूची का उपयोग करें।
3. नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE)
योजना की केंद्रीय सहायता, घटकों और लागू दिशा-निर्देशों की जानकारी के लिए मंत्रालय का आधिकारिक पेज देखें।
उत्तर प्रदेश के किसान कहां जाएं?
उत्तर प्रदेश में नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विकास अभिकरण यानी UPNEDA राज्य की नवीकरणीय ऊर्जा संबंधी प्रमुख एजेंसी है। इसकी आधिकारिक वेबसाइट पर UPNEDA KUSUM C-1 और KUSUM C-2 जैसे पोर्टल सूचीबद्ध हैं। ये संबंधित सोलराइजेशन गतिविधियों से जुड़े हैं; इसलिए आवेदन करने से पहले अपने उद्देश्य और घटक के अनुसार सही पोर्टल चुनें।
UPNEDA की वेबसाइट: UPNEDA Official Portals
उत्तर प्रदेश के किसानों को यह भी जांचना चाहिए कि उनके जिले में संबंधित घटक के लिए आवेदन, लाभार्थी चयन या भुगतान की प्रक्रिया फिलहाल उपलब्ध है या नहीं।
राज्यवार पोर्टल चुनते समय क्या जांचें?
- वेबसाइट संबंधित राज्य सरकार या नामित कार्यान्वयन एजेंसी की हो।
- पोर्टल पर PM-KUSUM का सही घटक और योजना का नाम दिया गया हो।
- आवेदन की अंतिम तारीख या रजिस्ट्रेशन की स्थिति स्पष्ट हो।
- किसान के अंशदान और भुगतान के निर्देश आधिकारिक नोटिस से मेल खाते हों।
- वेंडर या उपकरण का चयन राज्य की अनुमत प्रक्रिया के अनुसार हो।
यदि किसी राज्य का पोर्टल रजिस्ट्रेशन बंद होने का संदेश दिखाता है, तो उस संदेश को नजरअंदाज करके किसी अनजान वेबसाइट पर आवेदन न करें।
PM Kusum Yojana Application Status कैसे चेक करें?
अगर आपने पहले आवेदन किया है, तो उसकी स्थिति जानने के लिए उसी राज्य या एजेंसी के पोर्टल का इस्तेमाल करें जहां आवेदन जमा किया गया था। आवेदन की स्थिति देखने का विकल्प हर पोर्टल पर एक जैसा नहीं होता।
- अपने राज्य की आधिकारिक PM-KUSUM वेबसाइट खोलें।
- Application Status, Track Application, Beneficiary Login या संबंधित विकल्प खोजें।
- आवेदन संख्या, रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर या मांगी गई जानकारी दर्ज करें।
- OTP या अन्य सत्यापन मांगा जाए तो उसे आधिकारिक वेबसाइट पर पूरा करें।
- स्क्रीन पर दिखने वाली स्थिति पढ़ें और उपलब्ध होने पर रसीद या स्टेटस का रिकॉर्ड सुरक्षित रखें।
अगर स्टेटस विकल्प उपलब्ध नहीं है, तो आवेदन की रसीद के साथ संबंधित विभाग या जिला कार्यालय से संपर्क करें। किसी अनजान व्यक्ति को आवेदन संख्या के नाम पर भुगतान न करें।
आवेदन करने से पहले इन गलतियों से बचें
- गलत पोर्टल चुनना: दूसरे राज्य या किसी असंबंधित सोलर योजना के पोर्टल पर आवेदन न करें।
- सब्सिडी को लेकर गलतफहमी: विज्ञापन में लिखी अधिकतम सहायता को अपने लिए तय राशि न मानें।
- बिना स्वीकृति भुगतान: विभाग की निर्धारित प्रक्रिया और आधिकारिक रसीद के बिना किसी को पैसा न दें।
- फर्जी एजेंट पर भरोसा: कोई व्यक्ति निश्चित रूप से सोलर पंप दिलाने या लाभार्थी सूची में नाम जुड़वाने की गारंटी दे, तो सतर्क रहें।
- गलत जानकारी देना: भूमि, बिजली कनेक्शन, बैंक या पहचान से संबंधित विवरण में गलत जानकारी न भरें।
- पुराने नोटिस पर निर्भर रहना: पिछली आवेदन अवधि या पुराने टेंडर को वर्तमान में खुला हुआ न मानें।
राष्ट्रीय PM-KUSUM पोर्टल ने योजना के नाम पर फर्जी वेबसाइटों और मोबाइल ऐप से सावधान रहने की चेतावनी दी है। आवेदन और भुगतान के लिए केवल संबंधित सरकारी एजेंसी द्वारा बताए गए माध्यमों का इस्तेमाल करें। किसी अनधिकृत वेबसाइट पर पंजीकरण शुल्क या पंप की कीमत जमा न करें।
PM Kusum Yojana के आधिकारिक लिंक
| काम | आधिकारिक लिंक |
|---|---|
| PM-KUSUM राष्ट्रीय पोर्टल | यहां खोलें |
| राज्यवार कार्यान्वयन एजेंसियां | यहां देखें |
| MNRE योजना विवरण | यहां पढ़ें |
| उत्तर प्रदेश UPNEDA पोर्टल | यहां खोलें |
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. PM Kusum Yojana क्या है?
यह कृषि क्षेत्र में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने वाली केंद्र सरकार की योजना है। इसके अंतर्गत सौर ऊर्जा परियोजनाओं, स्टैंड-अलोन कृषि पंपों और मौजूदा ग्रिड-कनेक्टेड कृषि पंपों या फीडरों के सोलराइजेशन के लिए अलग-अलग व्यवस्थाएं हैं।
2. क्या PM Kusum Yojana में सोलर पंप मुफ्त मिलता है?
हर किसान को मुफ्त पंप मिलने की गारंटी नहीं है। योजना के अंतर्गत लागू सहायता, राज्य का योगदान और किसान का हिस्सा संबंधित घटक तथा राज्य के नियमों के अनुसार तय होता है।
3. PM Kusum Yojana में कितनी सब्सिडी मिल सकती है?
सामान्य राज्यों में कुछ घटकों के लिए केंद्रीय सहायता 30 प्रतिशत तक हो सकती है, जबकि कुछ निर्दिष्ट राज्यों और क्षेत्रों में अलग सहायता व्यवस्था है। अंतिम गणना स्वीकृत लागत, राज्य की सहायता और लागू दिशा-निर्देशों पर निर्भर करती है।
4. क्या 2026 में PM Kusum Yojana के नए आवेदन खुले हैं?
सभी राज्यों के लिए एक ही उत्तर देना सही नहीं होगा। MNRE के योजना पेज पर मूल अवधि 31 मार्च 2026 तक दर्ज है, जबकि राज्यवार आवेदन और परियोजनाओं की स्थिति अलग हो सकती है। आवेदन से पहले संबंधित राज्य की नवीनतम आधिकारिक सूचना देखें।
5. PM Kusum Yojana का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कहां होता है?
आवेदन संबंधित राज्य की नामित कार्यान्वयन एजेंसी या उसके आधिकारिक पोर्टल से संचालित हो सकता है। सही पोर्टल खोजने के लिए राष्ट्रीय PM-KUSUM वेबसाइट पर राज्यवार एजेंसियों की सूची देखें।
6. क्या आधार कार्ड जरूरी है?
पहचान और सत्यापन के लिए आधार या अन्य निर्धारित विवरण मांगे जा सकते हैं। कौन-सा दस्तावेज अनिवार्य है, यह संबंधित राज्य और आवेदन प्रक्रिया के निर्देशों से जांचें।
7. क्या जमीन के कागजात जरूरी हैं?
भूमि संबंधी दस्तावेज योजना के घटक और राज्य की प्रक्रिया के अनुसार मांगे जा सकते हैं। Component A जैसी परियोजनाओं में जमीन के उपयोग और परियोजना संबंधी शर्तें अलग हो सकती हैं।
8. आवेदन स्टेटस कैसे चेक करें?
जिस पोर्टल पर आवेदन किया था, वहां Application Status या संबंधित विकल्प देखें। यदि ऑनलाइन सुविधा उपलब्ध नहीं है, तो आवेदन रसीद के साथ संबंधित विभाग से संपर्क करें।
9. क्या आवेदन के लिए किसी एजेंट को पैसा देना जरूरी है?
किसी अनधिकृत एजेंट को पैसा देना जरूरी नहीं मानें। केवल आधिकारिक पोर्टल या संबंधित सरकारी एजेंसी द्वारा बताए गए भुगतान माध्यम का इस्तेमाल करें और हर भुगतान की रसीद सुरक्षित रखें।
10. अपने राज्य का PM Kusum पोर्टल कैसे खोजें?
राष्ट्रीय PM-KUSUM पोर्टल पर State Implementing Agencies की सूची खोलें। वहां से संबंधित राज्य की एजेंसी और उसके निर्देशों की जानकारी प्राप्त करें।
11. Component B और Component C में क्या अंतर है?
Component B में मुख्य रूप से स्टैंड-अलोन सोलर कृषि पंप लगाए जाते हैं। Component C में मौजूदा ग्रिड-कनेक्टेड कृषि पंपों या कृषि फीडरों का सोलराइजेशन शामिल है।
12. क्या PM Kusum Yojana से अतिरिक्त बिजली बेच सकते हैं?
कुछ लागू व्यवस्थाओं में अतिरिक्त सौर बिजली DISCOM को बेचने का विकल्प हो सकता है। यह संबंधित घटक, राज्य की व्यवस्था, बिजली खरीद समझौते और लागू टैरिफ पर निर्भर करता है।
निष्कर्ष
PM Kusum Yojana कृषि क्षेत्र में सौर ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ाने की महत्वपूर्ण पहल है। इसके माध्यम से पात्र लाभार्थियों को सोलर पंप, मौजूदा कृषि पंपों के सोलराइजेशन और सौर ऊर्जा परियोजनाओं से जुड़े अवसर मिल सकते हैं। लेकिन सब्सिडी, पात्रता, आवेदन की तारीख और लाभार्थी चयन के नियम हर राज्य और घटक में एक जैसे नहीं होते।
यदि आप आवेदन करना चाहते हैं, तो सबसे पहले राष्ट्रीय PM-KUSUM पोर्टल से अपने राज्य की कार्यान्वयन एजेंसी खोजें। फिर संबंधित राज्य के पोर्टल पर आवेदन की मौजूदा स्थिति, पात्रता, दस्तावेज और किसान के अंशदान की पुष्टि करें। आधिकारिक सूचना की जांच किए बिना किसी अनजान वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन या भुगतान न करें।
जानकारी संबंधी नोट: यह लेख योजना को समझने के लिए सामान्य सूचना प्रदान करता है। आवेदन, सब्सिडी, पात्रता और भुगतान के लिए नवीनतम केंद्रीय दिशा-निर्देश तथा संबंधित राज्य की आधिकारिक अधिसूचना को अंतिम मानें।
